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Showing posts from May, 2024

दुनिया का सबसे बड़ा बहरूपिया.. MOTI

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Komal Ahirwar🎤मूकनायक  आपका *एक वोट* भारत का भविष्य बचा सकता है जैसा कि हम सब देख रहे हैं, हमारा प्रिय राष्ट्र तानाशाही बनने के गंभीर खतरे में है - ❌मीडिया बिक चुका है ❌मणिपुर जल रहा है ❌ किसानों को अपने अधिकारों की मांग के लिए रबर की गोलियों और आंसू गैस का सामना करना पड़ा है ❌ हमारे ओलंपिक पहलवानों को एक बलात्कारी का विरोध करने पर पीटा गया ❌अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन जैसे विपक्षी नेताओं को बिना किसी सबूत के जेल में डाल दिया गया है ❌ सुप्रीम कोर्ट के जज दबाव में हैं ❌ ईडी और सीबीआई बीजेपी की वॉशिंग मशीन की कठपुतली बन गई हैं ❌ बलात्कारियों को माला पहनाकर जश्न मनाया जाता है ❌ सभी भ्रष्ट और अपराधी एक पार्टी में हैं ❌ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला - चुनावी बांड घोटाला जनता से छुपाया गया हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, *भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गांधीजी जैसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिसके लिए लड़ाई लड़ी, हमें उसे संरक्षित करना चाहिए।* आइए सत्ता के भूखे राजनेता के लिए इस विरासत को न खोएं। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम भारत के लोग जागें और बहुत देर ...

हम सब याद रखेंगे.. 👀

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कोरोना महाकाल को याद रखकर वोट देना.. कोरोना को निमंत्रण.. Rahul Gandhi ने नहीं.. मोदी ने दिया था..हम सब याद रखेंगे..  🙏नमस्ते ट्रम्प 🙏 https://youtu.be/6kU6Ad-ZmsQ?si=R1KywD8rFc11EEp4

बुंदेलखंड के सूरवीर महाराजा "छत्रसाल"

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लेखक -Komal Ahirwar मूकनायक प्रधान संपादक.. "रानी दमयंती दीप... महाराजा छत्रसाल जी का  जीवन परिचय .. विकिपीडिया.. के अनुसार  महाराजा छत्रसाल  बुन्देला (4 मई 1649 – 20 दिसम्बर 1731)  भारत  के मध्ययुग के एक महान प्रतापी “ राजपूत ” योद्धा थे.जिन्होने मुगल शासक  औरंगज़ेब  को युद्ध में पराजित करके  बुन्देलखण्ड  में अपना स्वतंत्र बुंदेला राज्य स्थापित किया और ' महाराजा ' की पदवी प्राप्त की।बुन्देलखण्ड वर्तमान में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर का हिस्सा है जहां बुंदेली भाषा का प्रचलन है..मुगलों के काल महाराज छत्रसाल जू देव बुंदेला का जन्म बुंदेला क्षत्रिय परिवार में हुआ था और वे ओरछा के रुद्र प्रताप सिंह बुन्देला के वंशज थे। वे अपने समय के महान वीर, संगठक, कुशल और प्रतापी राजा थे।  जीवन संघर्ष... उनका जीवन मुगलों की सत्ता के खि‍लाफ संघर्ष और  बुन्देलखण्ड  की स्‍वतन्त्रता स्‍थापि‍त करने के लि‍ए जूझते हुए नि‍कला। वे अपने जीवन के अन्तिम समय तक आक्रमणों से जूझते रहे।  बुन्देलखण्ड केसरी  के नाम से वि‍ख्‍यात महाराजा छत्रस...

संविधान बचाने का अंतिम कदम..

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"अभिव्यक्ति"---- Komal Ahirwar🎤मूकनायक  भारत के इस लोकसभा चुनाव में दलित विरोधी मनुवादी नेता बहुजन समाज में जन्मे महापुरुषों के चरणों में नाक रगड़ने लाइन क्यों लगाए है.. आखिर गीता रामायण को छोड़कर संविधान को गले में क्यों लटकाये क्यों घूम रहे है..  जिनकी "जय भीम और जय फुले कहने में हलक से जबान निकलती थी.. आज वह नेता "जय जय भीम" क्यों चिल्ला रहे है.. क़ल तक  जो बाबा साहेब  अम्बेडकर की प्रतिमा तुड़वाते थे और काला मुँह करवाते थे.. और सदन में आरक्षण को खत्म करने का दावा करते थे.. आखिर इन गिरगिटो ने भगवा से नीला रंग कैसे धारण कर लिया..?  बहुजन समाज के पढ़े लिखें लोग तो समझ रहे है..पर ये सभी जिग्नेश मेवाणी, रितु अम्बेडकर, महमूद पराचा, भानुप्रताप, प्रशांतभूषण या लक्ष्मण यादव का कलेजा लेकर पैदा तो  नहीं हुये ना ही रवीश कुमार जैसी बेबाकी उनके पास है..   ये सभी  पढ़े लिखें लोग..किसी ना किसी मजबूरी..या कोई ना कोई महत्वकांक्षा लेकर बीबीयो के पल्लू में छिपे है.. जो क़ल अपनी ही औलाद से अपमानित होंगे..क्योंकि ये अपनी लालच और जेल के डर से संविधान खत्म करने वाला का षड्य...