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दमोह का गौरवशाली इतिहास

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रानी दमयंती दीप... लेखक- Komal Ahirwar "मूकनायक " # दमोह #Damoh  यह लेख भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित नगरपालिका के बारे में है। इसी नाम के जिले के लिए, दमोह जिला देखें । दमोह...शहर दमोह में घंटाघर -देश  भारत राज्य मध्य प्रदेश दमोह भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में सागर डिवीजन का एक कस्बा है । यह कस्बा राज्य की राजधानी भोपाल से 260 किलोमीटर (162 मील) पूर्व में और टीकमगढ़ के उत्तर में स्थित है। यह दमोह जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है । #भूगोल दमोह 21°53′N 80°47′E / 21.88 , 80.78 पर स्थित है । [ 1 ] इसकी औसत ऊँचाई 595 मीटर (1952 फीट) है। #जनसांख्यिकी 2001 की भारत जनगणना के अनुसार , [ 2 ] दमोह की जनसंख्या 112,160 थी। पुरुषों की संख्या जनसंख्या का 53% और महिलाओं की संख्या 47% है। दमोह की औसत साक्षरता दर 73% है, जो राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक है: पुरुष साक्षरता 89% और महिला साक्षरता 66% है। दमोह में 14% जनसंख्या 6 वर्ष से कम आयु की है। #अर्थव्यवस्था इस कस्बे में एक महत्वपूर्ण पशु बाजार और बुनाई , रंगाई और मिट्टी के बर्तन बनाने जैसे कई छोटे उद्योग...

दमोह विधानसभा अनुसूचित वर्ग के लिये आरक्षित की जाये

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  Komal Ahirwar "मूकनायक" दमोह/ बहुजन समाज पार्टी दमोह के जिला प्रभारी एवं दमोह विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी कोमल अहिरवार ने दमोह निर्वाचन अधिकारी (श्री सुधीर कोचर) के माध्यम से भारतीय निर्वाचन आयोग दिल्ली के नाम आवेदन पत्र सौपा.. जिसमे दमोह विधानसभा क्षेत्र 55 क़ो अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित करने की अपील की..! कोमल अहिरवार ने आवेदन पत्र में लिखा दमोह जिले में चार विधानसभा क्षेत्र चारो विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओ की संख्या लगभग 45 से 50 हजार है, जो की जनसंख्या के आधार पर एक महत्वपूर्ण एवं बहुसंख्यक वर्ग है!  दमोह जिले में प्रथम विधानसभा चुनाव 1952 में संपन्न हुआ था 1952 से लेकर 2023 तक कुल 17 बार विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए किन्तु अत्यंत खेत का विषय है कि आज तक दमोह विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 55 को अनुसूचित जाति पर हेतु आरक्षित नहीं किया गया, जब की जनसंख्या अनुपात एवं संवैधानिक मानको के अनुसार यह क्षेत्र पूर्णतः अनुसूचित वर्ग के लिये पात्र है!  दमोह विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिशत जिले के अन...

अर्थशास्त्र के पितामह - डॉ भीमराव अम्बेडकर जी

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अर्थशास्त्र_के_पितामह - डॉ अम्बेडकर जी  दलित हिस्ट्री मंथः भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का अहम योगदान बाबा साहब की लिखी पुस्तक ’ रुपए की समस्या ’ संदर्भ ग्रंथ की तरह प्रयोग में आई दलित हिस्ट्री मंथः भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का अहम योगदान- क्या आप जानते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) डॉ. अम्बेडकर द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अस्तित्व में आया था ? हिल्टन यंग कमीशन, जिसे रॉयल कमीशन ऑन इण्डियन करेंसी एण्ड फाइनेंस के तौर पर भी जाना जाता है। डॉ अम्बेडकर द्वारा कमीशन के सामने प्रस्तुत दिशा-निर्देशों या निर्देशक सिद्धान्त के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक की संकल्पना व स्थापना की गई। आजादी से पहले 1926 में बाबासाहब ने हिल्टन यंग कमीशन के सामने बैंक स्थापना का मसौदा रखा था। तब इसके सभी सदस्यों ने उनके लिखे ग्रन्थ दी प्राब्लम ऑफ दी रुपी - इट्स ओरीजन एण्ड इट्स सोल्यूशन (रुपया की समस्या - इसके मूल और इसके समाधान) की जोरदार वकालत की थी और इसे संदर्भ ग्रंथ की तरह प्रयोग में लिया था। ब्रिटिशों की वैधानिक सभा ...

युद्ध और प्रतिशोध का 'अंधा युग'

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Komal Ahirwar"मूकनायक" 8 सितम्बर 2024 नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama) 23 अगस्त से 9 सितंबर 2024 के बीच हीरक जयंती नाट्य समारोह आयोजित कर रहा है। यह समारोह एनएसडी रंगमंडल की स्थापना के साठ वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। समारोह में 9 अलग-अलग नाटकों की कुल 22 प्रस्तुतियाँ होनी हैं। समारोह में 3 और 4 सितंबर को धर्मवीर भारती द्वारा रचित काव्य नाटक ‘अंधा युग’ खेला गया। यहाँ प्रस्तुत है नाटक की समीक्षा : ‘अंधा युग’ धर्मवीर भारती द्वारा रचित एक काव्य नाटक है। यह महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की घटनाओं पर आधारित है। युद्ध से प्राचीरें खंडहर हो चुकी हैं, नगर जल रहा है और कुरुक्षेत्र लाशों और गिद्धों से ढका हुआ है। कौरव सेना के कुछ विचलित योद्धा शोक और क्रोध से भरे हुए हैं। वे प्रतिशोध लेने के लिए, कुछ निर्णायक करने के लिए तरस रहे हैं और उस वक़्त भी अश्वत्थामा की निंदा करने से इनकार कर देते हैं। जब वह ब्रह्मास्त्र छोड़ता है, जो कि संपूर्ण पृथ्वी को नष्ट कर सकता है। इसके बजाय, वे युद्ध के लिए कृष्ण को दोष देते हुए, उन्हें श्राप तक दे...

जाति विहीन भारत.. क़ी कल्पना

राजनीति:  जाति विहीन भारत क़ी कल्पना जातिगत आरक्षण के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद-16 की जरूरतों को पूरा करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। Written by -Komal Ahirwar  मूकनायक   हमें फॉलो करें बृहत्तर हिंदू समाज (हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख) में जिस जातीय संरचना को ब्राह्मणवादी व्यवस्था का दुश्चक्र माना जाता है। हाल में केरल के शिवगिरि मठ में एक समारोह में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भारत में जाति व्यवस्था को खत्म कर जाति-विहीन एवं वर्ग-विहीन व्यवस्था की उम्मीद जताई थी। उन्होंने मंदिरों, गिरजाघरों और मस्जिदों के प्रमुखों से जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने यह बात तब कही है, जब दुनिया ‘वसुधैव कटुंबकम’ की धारणा से विमुख होकर अस्तित्ववाद की ओर बढ़ रही है। यह अस्तित्ववाद अमेरिका और ब्रिटेन से लेकर भारत तक में प्रखर राष्ट्रवाद के रूप में सामने आ रहा है। जबकि आर्थिक उदारवाद के परिप्रेक्ष्य में यह धारणा बनी थी कि दुनिया में व्यापार के माध्यम से ‘विश्व-ग्राम’ की स्थापना होगी, जो भारत की सांस्कृतिक परंपरा वसुधैव कुटुंबकम का ही पर्याय है। भ...