मैं मानवता का रक्षक -मूकनायक हूँ।
बहुजनो के शोषण के खिलाफ सबसे पहली आवाज उठाना मेरा फ़र्ज है।
क्योंकि मेरे ऊपर बाबा साहेब अंबेडकर का कर्ज है।।
👏जय भीम इंडिया
Komal Ahirwar "मूकनायक" दमोह/ बहुजन समाज पार्टी दमोह के जिला प्रभारी एवं दमोह विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी कोमल अहिरवार ने दमोह निर्वाचन अधिकारी (श्री सुधीर कोचर) के माध्यम से भारतीय निर्वाचन आयोग दिल्ली के नाम आवेदन पत्र सौपा.. जिसमे दमोह विधानसभा क्षेत्र 55 क़ो अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित करने की अपील की..! कोमल अहिरवार ने आवेदन पत्र में लिखा दमोह जिले में चार विधानसभा क्षेत्र चारो विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओ की संख्या लगभग 45 से 50 हजार है, जो की जनसंख्या के आधार पर एक महत्वपूर्ण एवं बहुसंख्यक वर्ग है! दमोह जिले में प्रथम विधानसभा चुनाव 1952 में संपन्न हुआ था 1952 से लेकर 2023 तक कुल 17 बार विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए किन्तु अत्यंत खेत का विषय है कि आज तक दमोह विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 55 को अनुसूचित जाति पर हेतु आरक्षित नहीं किया गया, जब की जनसंख्या अनुपात एवं संवैधानिक मानको के अनुसार यह क्षेत्र पूर्णतः अनुसूचित वर्ग के लिये पात्र है! दमोह विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिशत जिले के अन...
रानी दमयंती दीप... लेखक- Komal Ahirwar "मूकनायक " # दमोह #Damoh यह लेख भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित नगरपालिका के बारे में है। इसी नाम के जिले के लिए, दमोह जिला देखें । दमोह...शहर दमोह में घंटाघर -देश भारत राज्य मध्य प्रदेश दमोह भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में सागर डिवीजन का एक कस्बा है । यह कस्बा राज्य की राजधानी भोपाल से 260 किलोमीटर (162 मील) पूर्व में और टीकमगढ़ के उत्तर में स्थित है। यह दमोह जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है । #भूगोल दमोह 21°53′N 80°47′E / 21.88 , 80.78 पर स्थित है । [ 1 ] इसकी औसत ऊँचाई 595 मीटर (1952 फीट) है। #जनसांख्यिकी 2001 की भारत जनगणना के अनुसार , [ 2 ] दमोह की जनसंख्या 112,160 थी। पुरुषों की संख्या जनसंख्या का 53% और महिलाओं की संख्या 47% है। दमोह की औसत साक्षरता दर 73% है, जो राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक है: पुरुष साक्षरता 89% और महिला साक्षरता 66% है। दमोह में 14% जनसंख्या 6 वर्ष से कम आयु की है। #अर्थव्यवस्था इस कस्बे में एक महत्वपूर्ण पशु बाजार और बुनाई , रंगाई और मिट्टी के बर्तन बनाने जैसे कई छोटे उद्योग...
भारत की 5 मुख्य महिला स्वतंत्रता सेनानी Komal Ahirwar "मूकनायक" रानी दमयंती दीप दमोह मध्यप्रदेश भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों से आज़ादी के लिए घोर संघर्ष किया। ऐसे में कई महिला स्वतंत्रता सेनानियों ने भी इस संघर्ष के प्रति अपार योगदान दिया। आज़ादी की लड़ाई में महिलाओं का अविश्वसनीय योगदान सत्र 1817 से आरम्भ हुआ जब भीमाबाई होल्कर ने ब्रिटिश कर्नल मलकम के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई कर उन्हें हराया। इसके बाद और भी कई बहादुर महिलाओं ने अंग्रेजों पर विजय प्राप्त कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ अदा की। आइये इनमें से कुछ महिला स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानते है। रानी लक्ष्मी बाई जिन्हें एक औरत द्वारा प्रदर्शित ताकत और साहस का प्रतीक माना जाता है। 1857 में झांसी की इस रानी ने वक़्त आने पर अपने पुत्र सहित मैदान में उतर कर दुश्मनों का बहादुरी से सामना किया एवं मराठा राज्य सहित देश को भी सम्मान दिलाया । वाराणसी में 19 नवंबर, 1928 को जन्मीं रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम मणिकर्णिका था और प्यार से उन्हें मनु कहकर लोग पुकारते थे। अपने चंचल स्वभाव और सुंदरता की वजह से रानी लक्ष्मीबाई ...
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