जाति विहीन भारत.. क़ी कल्पना
राजनीति: जाति विहीन भारत क़ी कल्पना जातिगत आरक्षण के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद-16 की जरूरतों को पूरा करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। Written by -Komal Ahirwar मूकनायक हमें फॉलो करें बृहत्तर हिंदू समाज (हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख) में जिस जातीय संरचना को ब्राह्मणवादी व्यवस्था का दुश्चक्र माना जाता है। हाल में केरल के शिवगिरि मठ में एक समारोह में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भारत में जाति व्यवस्था को खत्म कर जाति-विहीन एवं वर्ग-विहीन व्यवस्था की उम्मीद जताई थी। उन्होंने मंदिरों, गिरजाघरों और मस्जिदों के प्रमुखों से जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने यह बात तब कही है, जब दुनिया ‘वसुधैव कटुंबकम’ की धारणा से विमुख होकर अस्तित्ववाद की ओर बढ़ रही है। यह अस्तित्ववाद अमेरिका और ब्रिटेन से लेकर भारत तक में प्रखर राष्ट्रवाद के रूप में सामने आ रहा है। जबकि आर्थिक उदारवाद के परिप्रेक्ष्य में यह धारणा बनी थी कि दुनिया में व्यापार के माध्यम से ‘विश्व-ग्राम’ की स्थापना होगी, जो भारत की सांस्कृतिक परंपरा वसुधैव कुटुंबकम का ही पर्याय है। भ...