कांग्रेस Sc/St और महिलाओ के साथ छलावा कर रही है..साथ
रानी दमयंती दीप..
संपादक - कोमल अहिरवार "मूकनायक "
दमोह / कुल आबादी में महिलाओं की 50 %आवादी ,कुल आबादी में पिछड़े वर्गों की 52%आबादी,कुल आबादी में अल्पसंख्यकों की 25% आबादी,कुल आबादी में अनु जनजातियों की 22% आबादी, कुल आबादी में अनुसूचित जातियों की 20% आबादी और इन सब वर्गों को कुल 50% आरक्षण देने का प्रस्ताव कांग्रेस के संपन्न हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में पास किया गया है जो अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के साथ कांग्रेस का छलावा और धोका है ? क्योंकि हमारे ही मध्यप्रदेश में अनुसूचित जातियों के लिए और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा और विधानसभा के निर्वाचन स्थानों में १६% और २०% कुल ३६% आरक्षण भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३३० /३३२ के अनुसार निर्धारित है और इन संवैधानिक प्रावधानों की मंशानुरूप हम लोग पिछले कई सालों से कांग्रेस हाईकमान को ज्ञापन पत्र सौंपकर कांग्रेस के संगठनात्मक पदों में अनुसूचित जातियों को और अनुसूचित जनजातियों को १६%/२०% कुल ३६% से कम आरक्षण नहीं मिलना चाहिए की मांग करते रहे हैं। और कांग्रेस द्वारा अनुसूचित जातियों और जनजातियों को कांग्रेस के संगठनात्मक पदों में आरक्षण नहीं देने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकारों की तीखी आलोचनाएं भी करते रहे हैं लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकारों ने फिर से अनुसूचित जातियों और जनजातियों को के साथ धोका और छलावा किया है ? क्योंकि अनुसूचित जातियों को स्पष्ट रूप से १६% और अनुसूचित जनजातियों को स्पष्ट रूप से २०% आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए था क्योंकि अनुसूचित जातियों को और अनुसूचित जनजातियों को संविधान की मंशा से हटकर कम संख्या में आरक्षण दिया ही नहीं दिया जाना चाहिए और भारतीय संविधान की मंशा से हटकर कम संख्या में आरक्षण दिया जाना प्रस्तावित है तो वह प्रस्ताव संविधान का उलंघन है और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के साथ साथ अल्पसंख्यकों को और पिछड़े वर्गों को तथा महिलाओं को भी आरक्षण देना है तो उन्हें भी संविधान की मंशानुरूप अलग अलग संख्या में आरक्षण का प्रतिशत स्पष्ट किया जाना चाहिए था जो स्पष्ट रूप से खुलासा नहीं किया है जो इन अल्पसंख्यकों के साथ और पिछड़े वर्गों के साथ और महिलाओं के साथ भी कांग्रेस का धोका और छलावा है ,हम कांग्रेस हाईकमान से और कांग्रेस के रणनीतिकारों से जानना चाहते हैं कि उस ५०% आरक्षण में:- (१) पिछड़े वर्गों के लिए कितना आरक्षण है?(२) अल्पसंख्यकों के लिए कितना आरक्षण है? (३) अनुसूचित जातियों के लिए कितना आरक्षण है? (४) अनुसूचित जातियों के लिए कितना आरक्षण है?(५) महिलाओं के लिए कितना आरक्षण है? , स्पष्ट करें? और स्पष्ट नहीं करते हैं तो ये अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के साथ कांग्रेस का छलकपट/ धोका/छलावा के अलावा कुछ भी नहीं है? हमारी वहीं मांग है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पदों में और शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पदों में और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पदों में और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पदों में और कांग्रेस विधायक दल के नेता के पदों में और उनकी कार्य समिति के पदों सहित अन्य राजनैतिक समितियों के पदों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३३० और ३३२ की मंशानुरूप
३६% आरक्षण चाहिए। जो नहीं दिया गया है? अभी वर्तमान में भी पूर्व से महिलाओं/ अल्पसंख्यकों/पिछड़े वर्गों/अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के लिए ५०% आरक्षण दिए जाने के प्रावधान है उसके बाबजूद कांग्रेस के संगठनात्मक पदों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को ५% आरक्षण भी नहीं मिल रहा है। कांग्रेस के रणनीतिकारों की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को भारतीय संविधान की मंशानुरूप अर्थात जितना प्रतिशत आरक्षण लोकसभा/ विधानसभाओं के स्थानों में आरक्षण है मिल रहा है उतना प्रतिशत आरक्षण देने की नियत साफ़ नज़र नहीं आ रही है इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस के रणनीतिकार दलित आदिवासी हितैषी ना होकर दलित आदिवासी अर्थात अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विरोधी मानसिकता के लोग बैठे हुए हैं।हमारा आन्दोलन जारी रहेगा।
मूलचंद जी कि कलम से....

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